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शनिवार, 7 मई 2016

GAGAR ME SAGAR - Sea eruption from a Magic Pot

दोस्तो
हमारा सारा अस्तित्व जल से टीका है.अंतरीक्ष से हमारी धरतीमां  सबसे खूबसुरत दिखती है इसकी वजह भी जल है.जीस जगह जल होता है वहां जीवन होता है. जलसे समग्र संसार जीवंत है.मनुष्य हंमेशा से ही पानीके पास ही पनपा है,हमारी सारी सभ्यताए पानीके पास ही विकसीत हुइ.हमारा जलसे लगाव इतना है की हम गागर में सागर भर कर हमारे साथ रखना चाहते है. जहां सागर नहीं आ सकता वहां एक फव्वारा( फाउन्टन) भी हमे मनकी शांति प्रदान करता है ओर आसपासके वातावरणमें जीवन,ताजगी ओर त्रुप्ती भर देता है.
जल पर कइ सारे कवियोने  अपनी अपनी रचनाए रची है.कइ फिल्मी गीतभी बने है.पानीका निश्र्चल स्वभाव उसके रंगमें दिखता है.सारे संसार पर इतना उपकार करनेके बादभी पानी अहम् नहीं करता.इसी लिए तो गीतकार संतोष आनंदने कहा है की "पानी रे पानी तेरा रंग कैसा ,जिसमें मिलादो लगे उस जैसा."
जल का जादु ही है की सुर्यकी रंगहीन किरन सप्तरंगी मेघधनुष बन जाती है.

आज पानीका उपकार हम भुल गये है.पानीका अवमुल्यन करते हुए जरुरतसे ज्यादा ही दोहन कर रहे है.आज हमने गंगाको "गंगामैया" मान ने के बावजुद भी गंदी करदी.नाइल भी अपने संगम स्थान तक पहोंचे तब तक एक गंदे नालेमें परिवर्तित कर दी.तकरीबन संसारके सारे जलस्त्रोत्रोकी आज हम मनुष्योने दुर्दशा कर दी.यह कैसी विटंबना है की दुर सुदुर अवकाशिय पिंडोमें पानी ढुंढता हुआ ईन्सान धरती पर पानीकी अहमियत को भुल गया!!!!!
-दिप्तेश


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