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बुधवार, 21 अक्टूबर 2015

Micro Universe

कायनातका सुक्ष्म रुप  


दोस्तो
धरती मां के कितने सुंदर रुप होते है? कहीं पर सपाट रेत पे हवाओने जैसे अपने ओटोग्राफ दीये हे तो कही पर समुद्रके पानी पर सुरज अपना सोना बिखरता है, तो कहीं पर बर्फकी कंचुकीसे धरतीमांने जेसे अपने उन्नत उरजोको कसके बांधा है, तो कहीं पे हरी ओढनी ओडली है.
यहां इस तस्विरमें धरतीमांका एक ओर ही रुप निखरा हे.लगता है की जैसे धरतीमांने सारी कायनातका सुक्ष्म रुप के दर्शन करवाये है.जैसे कायनातके एक एक कण एक-दुसरेसे भिन्न होते हुऐ भी एक-दुसरेके साथ एक आकर्षण से जुडे हुए हे ठिक इसी प्रकारसे ए शिलाए आपसमें जुडी हुइ है.
जबसे प्रलय थमा होगा तबसे न जाने कितने करोडो साल बित गये होंगे ये अरवल्लीकी शिलाए एक-दुजेको संजोये हुए है, अभी न जाने कितने करोड साल तक ये एसे ही एक-दुजेको सहारा देते रहेंगे?
आज मनुष्य अपनी राक्षसी ताकातसे जिसको मां कहता हे उसके ही दोहनमें लगा हे.क्या हम ये अनोखी कुदरत को बचा पायेंगे?
-दिप्तेश रावल

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