दोस्तो
हर तस्विर कुछ ऐसा दिखाना ओर सिखाना चाहती है जो हम खुली आंखो से नहीं देख सकते मगर खुल्ले दिमाग से देख सकते है.
दोस्तो
इस तस्विर हमको क्या दिखाती ओर सिखाती हे? सोचो............
प्रथम द्रष्टी से तो ये एक गोंसला है , चिडिया का छोटा सा बच्चा इसमें पनाह लिये सिर्फ़ चोंच दिखाते हुए बैठा हे. लगता हे की अपने मा-बाप को पुकार रहा हे.
लेकिन अगर हम जरा सा गहन सोचे तो हमको क्या दिखाइ देता हे? मुजे तो इसमे इसके मा-बाप का प्यार,दुलार,त्याग-बलिदान दिखाइ देता हे. कितने प्यार से ओेर कितनी ही मुसिबतो से लडते हुए उन्होने अपने बच्चे के लीये ए गोंसला तेैयार किया होगा? क्यों? कंयोा की मा-बाप अपने बच्चे को स्वस्थ ओर सुरक्षित रखाना चाहते हे.
क्या बच्चे बडे होकर इतनाही खयाल अपने मा-बाप का रखते हे? एसा भी हो सकता है की पंख निकल आने पर बच्चे मा-बाप को भुल कर अपनी दुनिया बनाने उड जाये, फिर भी मा-बाप कभी भी इस बात की परवाह नहिं करते.मा-बाप तो अपना प्यार,दुलार,मिलकत,.....,.....सब कुछ बच्चे पर लुटा देते हे.
दोस्तो इसी लीये मेने आगे बताया हे की हर तस्विर अपनी एक अलग ही कहानी संजोये हुए होती हे जो हम खुली आंखोसे नहीं देख सकते. इस तस्विरमे मा-बाप नहीं दिखते फिर भी ये तस्विर तो उनको ही दिखाती हे बस इसके लिये नजरिया चाहिये.
- दिप्तेश रावल
हर तस्विर कुछ ऐसा दिखाना ओर सिखाना चाहती है जो हम खुली आंखो से नहीं देख सकते मगर खुल्ले दिमाग से देख सकते है.
दोस्तो
इस तस्विर हमको क्या दिखाती ओर सिखाती हे? सोचो............
प्रथम द्रष्टी से तो ये एक गोंसला है , चिडिया का छोटा सा बच्चा इसमें पनाह लिये सिर्फ़ चोंच दिखाते हुए बैठा हे. लगता हे की अपने मा-बाप को पुकार रहा हे.
लेकिन अगर हम जरा सा गहन सोचे तो हमको क्या दिखाइ देता हे? मुजे तो इसमे इसके मा-बाप का प्यार,दुलार,त्याग-बलिदान दिखाइ देता हे. कितने प्यार से ओेर कितनी ही मुसिबतो से लडते हुए उन्होने अपने बच्चे के लीये ए गोंसला तेैयार किया होगा? क्यों? कंयोा की मा-बाप अपने बच्चे को स्वस्थ ओर सुरक्षित रखाना चाहते हे.
क्या बच्चे बडे होकर इतनाही खयाल अपने मा-बाप का रखते हे? एसा भी हो सकता है की पंख निकल आने पर बच्चे मा-बाप को भुल कर अपनी दुनिया बनाने उड जाये, फिर भी मा-बाप कभी भी इस बात की परवाह नहिं करते.मा-बाप तो अपना प्यार,दुलार,मिलकत,.....,.....सब कुछ बच्चे पर लुटा देते हे.
दोस्तो इसी लीये मेने आगे बताया हे की हर तस्विर अपनी एक अलग ही कहानी संजोये हुए होती हे जो हम खुली आंखोसे नहीं देख सकते. इस तस्विरमे मा-बाप नहीं दिखते फिर भी ये तस्विर तो उनको ही दिखाती हे बस इसके लिये नजरिया चाहिये.
- दिप्तेश रावल

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